Ghazals sad best Ghazal best love sad poetry

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ہے عجیب شہر کی زندگی نہ سفر رہا نہ قیام ہے Ghazals
کہیں کاروبار سی دوپہر کہیں بد مزاج سی شام ہے

یونہی روز ملنے کی آرزو بڑی رکھ رکھاؤ کی گفتگو
یہ شرافتیں نہیں بے غرض اسے آپ سے کوئی کام ہے

کہاں اب دعاؤں کی برکتیں وہ نصیحتیں وہ ہدایتیں
یہ مطالبوں کا خلوص ہے یہ ضرورتوں کا سلام ہے

وہ دلوں میں آگ لگائے گا میں دلوں کی آگ بجھاؤں گا
اسے اپنے کام سے کام ہے مجھے اپنے کام سے کام ہے

نہ اداس ہو نہ ملال کر کسی بات کا نہ خیال کر
کئی سال بعد ملے ہیں ہم ترے نام آج کی شام ہے

کوئی نغمہ دھوپ کے گاؤں سا کوئی نغمہ شام کی چھاؤں سا
ذرا ان پرندوں سے پوچھنا یہ کلام کس کا کلام ہے

بشیر بدر

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ओ अजीब शहर का जीवन न तो यात्रा है और न ही रुकना है
कभी-कभी यह दोपहर का कारोबार होता है, कभी-कभी यह एक खराब शाम होती है

इस तरह के दिन को पूरा करने की इच्छा एक महान रखरखाव का विषय है
ये रईस निस्वार्थ नहीं हैं

प्रार्थनाओं का आशीर्वाद, सलाह, मार्गदर्शन कहाँ हैं?
यह मांगों की ईमानदारी है, यह जरूरतों का अभिवादन है

वह मेरे दिल में आग लगा देगा। मैं दिलों की आग बुझा दूंगा
वह अपने काम में व्यस्त हैं। मैं अपने काम में व्यस्त हूं

दुखी मत होना, उदास मत होना, किसी बात की चिंता मत करना
हम कई साल बाद मिले। यह शाम आपके नाम है

धूप के गाँव जैसा गीत, शाम की परछाई जैसा गीत
बस इन पक्षियों से पूछें कि यह किसका शब्द है

बशीर बद्र

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یوں ہی بے سبب نہ پھرا کرو کوئی شام گھر میں رہا کرو
وہ غزل کی سچی کتاب ہے اسے چپکے چپکے پڑھا کرو

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کوئی ہاتھ بھی نہ ملائے گا جو گلے ملو گے تپاک سے
یہ نئے مزاج کا شہر ہے ذرا فاصلہ سے ملا کرو

ابھی راہ میں کئی موڑ ہیں کوئی آئے گا کوئی جائے گا
تمہیں جس نے دل سے بھلا دیا اسے بھولنے کی دعا کرو

مجھے اشتہار سی لگتی ہیں یہ محبتوں کی کہانیاں
جو کہا نہیں وہ سنا کرو جو سنا نہیں وہ کہا کرو

کبھی حسن پردہ نشیں بھی ہو ذرا عاشقانہ لباس میں
جو میں بن سنور کے کہیں چلوں مرے ساتھ تم بھی چلا کرو

نہیں بے حجاب وہ چاند سا کہ نظر کا کوئی اثر نہ ہو
اسے اتنی گرمیٔ شوق سے بڑی دیر تک نہ تکا کرو

یہ خزاں کی زرد سی شال میں جو اداس پیڑ کے پاس ہے
یہ تمہارے گھر کی بہار ہے اسے آنسوؤں سے ہرا کرو

بشیر بدر

बिना किसी कारण के न घूमें। एक शाम घर पर रहें
यह ग़ज़ल की एक सच्ची पुस्तक है। इसे गुप्त रूप से पढ़ें

कोई भी ऐसा हाथ नहीं मिलाएगा जो तपाक को गले लगा ले
यह नए मिजाज का शहर है, बस दूर से मिलते हैंbest Ghazal best love sad poetry

रास्ते में कई मोड़ हैं। कुछ आएंगे, कुछ जाएंगे
जो आपको दिल से भूल गया, उसे भूलने की प्रार्थना करें

ये प्रेम कहानियाँ मुझे विज्ञापनों जैसी लगती हैं
जो नहीं कहा गया है उसे सुनें, जो नहीं सुना है उसे कहें

कभी-कभी एक छोटे से रोमांटिक कपड़े में एक सुंदर घूंघट नशे में हो सकता है
मैं जहां भी जाऊंगा, तुम्हारे साथ ही जाऊंगा

नहीं, बिना हिजाब के, बिना किसी नज़र के चाँद जैसा
इतने लंबे समय के लिए उसे परेशान मत करो

यह उदास पेड़ के पास पीले शरद ऋतु के शाल में है
यह आपके घर का झरना है। इसे आंसुओं से हराएं

बशीर बद्र

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