Sad ghazals best ghazals evers hit ghazals

Spread the love

Sad ghazals best ghazals evers hit ghazals

گھر سے نکلا تو ملاقات ہوئی پانی سے sad ghazals
کہاں ملتی ہے خوشی اتنی فراوانی سے

خوش لباسی ہے بڑی چیز مگر کیا کیجئے
کام اس پل ہے ترے جسم کی عریانی سے

سامنے اور ہی دیوار و شجر پاتا ہوں
جاگ اٹھتا ہوں اگر خواب جہاں بانی سے

عمر کا کوہ گراں اور شب و روز مرے
یہ وہ پتھر ہے جو کٹتا نہیں آسانی سے

شام تھی اور شفق پھوٹ رہی تھی ثروت
ایک رقاصہ کی جلتی ہوئی پیشانی سے

Sad ghazals best ghazals evers hit ghazals

जब वह घर से निकला, तो वह पानी से मिला
सुख कहाँ से आता है बहुतायत से?

खुश पोशाक एक बड़ी बात है लेकिन क्या करें
काम इस समय शरीर की नग्नता से है

मुझे सामने एक और दीवार और पेड़ मिला
अगर मैं संस्थापक का सपना देखता हूं तो मैं जाग जाता हूं

उम्र का पहाड़ भारी है और दिन-रात मरता है
यह एक ऐसा पत्थर है जो आसानी से नहीं कटता

शाम हो चुकी थी और सांझ ढल रही थी
नर्तकी के जलते माथे से

Sad ghazals best ghazals evers hit ghazals

طے کروں گا یہ اندھیرا میں اکیلا کیسے
میرے ہمراہ چلے گا مرا سایہ کیسے

میری آنکھوں کی چکا چوند بتا سکتی ہے
جس کو دیکھا ہی نہ جائے اسے دیکھا کیسے

چاندنی اس سے لپٹ جائے ہوائیں چھیڑیں
کوئی رہ سکتا ہے دنیا میں اچھوتا کیسے

میں تو اس وقت سے ڈرتا ہوں کہ وہ پوچھ نہ لے
یہ اگر ضبط کا آنسو ہے تو ٹپکا کیسے

یاد کے قصر ہیں امید کی قندیلیں ہیں
میں نے آباد کیے درد کے صحرا کیسے

اس لیے صرف خدا سے ہے تخاطب میرا
میرے جذبات کو سمجھے گا فرشتہ کیسے

ذہن میں نت نئے بت ڈھال کے یہ دیکھتا ہوں
بت کدے کو وہ بنا لیتا ہے کعبہ کیسے

اس کی قدرت نے میرا راستہ روکا ہوگا
پوچھ مجھ سے کہ قیامت ہوئی برپا کیسے

گر سمندر ہی سے دریاؤں کا رزق آتا ہے
اس کے سینے میں اتر جاتے ہیں دریا کیسے

ٹوٹتی رات نے سورج سے یہ سرگوشی کی
میں نہ ہوتی تو تیرا اندر برستا کیسے

Sad ghazals best ghazals evers hit ghazals

मैं यह तय करूंगा कि अंधेरे में इसे अकेले कैसे किया जाए
मेरी छाया मेरे साथ कैसे जाएगी?
 
मेरी नजर में ट्विंकल बता सकती है
किसी ऐसे व्यक्ति को कैसे देखा जाए जिसे देखा भी नहीं जाता
 
इसके साथ चाँद को चमकने दो, हवाओं को उड़ने दो
दुनिया में कोई कैसे अछूता रह सकता है?
 
मुझे डर है कि वह नहीं पूछेगा
अगर यह ज़ब्त का आंसू है तो टपकना कैसे
 
यादें छोटी हैं, उम्मीद की मोमबत्तियाँ हैं
मैंने दर्द का रेगिस्तान कैसे बसाया
 
इसलिए मेरा पता केवल ईश्वर से है
एक देवदूत मेरी भावनाओं को कैसे समझेगा?
 
मैं इसे अपने दिमाग में एक नई मूर्ति ढाल के साथ देखता हूं
वह काबा की मूर्ति कैसे बना सकता है?
 
उसकी शक्ति ने मुझे रोका होगा
मुझसे पूछें कि घंटा कैसे बीत गया
 
नदियों का निर्वाह गिरते समुद्र से होता है
कैसे नदी उसके सीने में धंस जाती है
 
जागते हुए रात सूरज के लिए फुसफुसाई
अगर यह मेरे लिए नहीं था, तो आपके अंदर कैसे बारिश हो सकती है?

تجھے اظہار محبت سے اگر نفرت ہے
تو نے ہونٹوں کو لرزنے سے تو روکا ہوتا

بےنیازی سے مگر کانپتی آواز کے ساتھ 
تو نے گھبرا کے میرا نام نہ پوچھا ہوتا

تیرے بس میں تھی اگر مشعل جذبات کی لو
تیرے رخسار میں گلزار نہ بھڑکا ہوتا

یوں تو مجھ سے ہوئیں صرف آب وہوا کی باتیں
اپنے ٹوٹے ہوئے فقروں کو تو پرکھا ہوتا

یونہی بے وجہ ٹھٹھکنے کی ضرورت کیا تھی
دم رخصت اگر یاد نہ آیا ہوتا

تیرا غماز بنا خود تیرا انداز خرام 
دل نہ سنبھلا تھا تو قدموں کو سنبھالا ہوتا

اپنے بدلے میری تصویر نظر آجاتی 
تو نے اس وقت اگر آئینہ دیکھا ہوتا

حوصلہ تجھ کو نہ تھا مجھ سے جدا ہونے کا
ورنہ کاجل تیری آنکھوں میں نہ پھیلا ہوتا

https://shayari-urdu-hindi.com/shayari-hindi-shayari-urdu-2-line-shayari-best-shayari/

अगर आप प्यार के इजहार से नफरत करते हैं
आपने अपने होंठ कांपने से रोक दिए होंगे

निस्वार्थ लेकिन कांपती आवाज के साथ
आपने घबराहट में मेरा नाम नहीं पूछा होगा

अगर भावनाओं की मशाल आपके बस में थी
तुम्हारे चेहरे का फूल नहीं खिलता

मेरे साथ जो हुआ वह सब मौसम का था
उसने अपने टूटे हुए वाक्यों को आजमाया होगा

बिना किसी कारण के दस्तक देने की जरूरत नहीं थी
अगर मुझे याद न होता

अपने ग़मज़ को अपना अंदाज़ बनाओ
अगर दिल को नियंत्रित नहीं किया गया होता, तो कदम नियंत्रित हो जाते

इसके बजाय मेरी तस्वीर दिखाई देगी
अगर आपने आईने में देखा होता तो

आप में मुझसे अलग होने की हिम्मत नहीं थी
नहीं तो आपकी आंखों में काजल नहीं फैलता

عالم ہجر میں سویا ہوں نہ سونا چاہوں 
میں تری ذات سے مایوس نہ ہونا چاہوں

گل ترے دل میں کھلیں اور مہک جاؤں میں 
اس رشتے میں ہر انسان کو پرونا چاہوں 

کیوں گوارا ہو ترے درد میں شرکت غیر 
تو جو یاد آئے تو تنہائی میں رونا چاہوں 

جستجو کے لیئے رہتا ہے بہانہ درکار 
کھو کے پایا جسے پاکر اسے کھونا چاہوں 

چھا رہا ہے مرے اندر غم انجام کا ابر
خوش بھی ہوتا ہوں تو آنکھوں کو بھگونا چاہوں 

میں ہوں اک طرفہ بھکاری کوئی میری بھی سنو
رات کے فرش پہ کرنوں کا بچھونا چاہوں 

یوں تو اک پھول کی پتی سے بہل جاتا ہوں
میں مچل جاؤں تو صحرا کا کھلونا چاہوں 

میرا منصب نہیں پیغمبر فن بننے کا 
میں تو احساس کو لفظوں میں سمونا چاہوں 

اس زمانے کا عجب طرز تصوف ہے ندیم 
کہ میں قطرے میں سمندر کو ڈبونا چاہوں

Sad ghazals best ghazals evers hit ghazals

मैं हज की दुनिया में सोया हूं और मैं सोना नहीं चाहता
मैं ट्रिनिटी से निराश नहीं होना चाहता

मेरे दिल में फूल खिलने दो और मुझे सूंघने दो
मैं हर इंसान को इस रिश्ते में प्रभावित करना चाहूंगा

आप दर्द में क्यों नहीं भाग लेते?
इसलिए जब मैं याद करता हूं, तो मैं एकांत में रोना चाहता हूं

खोज के लिए एक बहाना चाहिए
मैंने वो पाया जो मैं खोना चाहता था

दुःख के बादल मृतकों को ढँक रहे हैं
अगर मैं खुश हूं, तो भी मैं अपनी आंखों को भिगोना चाहूंगा

मैं एक तरफा भिखारी हूं। मेरी बात सुनो
मैं रात में फर्श पर किरणें फैलाना चाहता हूं

इस तरह मैं एक फूल की पंखुड़ी से विचलित हूं
अगर मैं मिशेल जाऊं तो मुझे एक रेगिस्तानी खिलौना चाहिए

मेरी स्थिति कला के नबी होने की नहीं है
मैं सिर्फ शब्दों में भाव डालना चाहता हूं

इस युग की सूफीवाद की अद्भुत शैली नदीम है
कि मैं समुद्र को बूंदों में डुबो देना चाहता हूं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *